36 वर्गफुट में बनाया घर, कीमत एक लाख


झांसी।
बजट होम्स की मांग आने वाले समय में सबसे ज्यादा होने वाली है। जिसके चलते नए प्रयोग हो रहे हैं। आर्किटेक्ट नए नक्शों पर काम कर रहे हैं, तो डेवल्पर्स भी ऐसे नए बाजार को टैप करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से अरुण प्रभु नामक व्यक्ति ने इस बाजार को बदल देने का काम किया है। अरुण प्रभु ने मात्र एक लाख की कीमत वाला घर तैयार किया है जिसमें मात्र 36 वर्गफुट स्पेस में बेडरूम, लिविंग रूम, किचन, टॉयलेट, बाथटब और वर्कस्पेस को बखूबी निकाला गया है। खास बात यह भी है कि इसमें 250 लीटर के वाटर टैंक की व्यवस्था भी की गई है।

तमिलनाडु के नमक्कल में पारामथी वेल्लोर के रहने वाले अरुण पिछले साल मुंबई और चेन्नई के स्लम एरिया में रिसर्च कर रहे थे। इसी रिसर्च के दौरान उन्होंने झुग्गियों के हालात देखे। एक झुग्गी की कीमत कम से कम चार से पांच लाख थी। बावजूद इसके टॉयलेट जैसी सुविधाओं से लोग वंचित थे। अरुण ने तय किया कि वह इस समस्या का कोई बढिय़ा समाधान निकालेंगे। लेकिन जब काम के जुटे और परिणाम सामने आया, तो आज अरुण प्रभु पहले व्यक्ति बन गए हैं, जिन्होंने देशभर के लोगों के लिए अपने घर की उम्मीदों को नए पंख दे दिए हैं।

अरुण ने सोलो 0.1 नाम से मात्र 36 वर्गफुट में घर तैयार किया है, यह चलता फिरता भी है। उन्होंने इस घर को बेंगलुरू की डिजाइन और आर्किटेक्ट कंपनी बिलबोर्ड के साथ मिलकर बनाया है। मात्र 23 साल के अरुण ने एक पुराने थ्री-व्हीलर ऑटो और रीसाइकल्ड चीजों से बनाया है। यह घर सोलर बैट्री से चलता है और इसमें आराम से दो लोग रह सकते हैं। इस घर को बनाने में करीब पांच महीने का समय लगा और इसके विशेष रूप से मजदूरों, बेघरों, छोटे दुकानदारों को कम कीमत में अस्थाई घर मुहैया करवाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। बहरहाल 600 वॉट के सोलर पैनल, कपबोड्र्स, कपड़े सुखाने के हैंगर, छत पर जाने के लिए सीढिय़ों के साथ इसमें लगाई गई तमाम सुविधाएं चर्चा का विषय बन गई हैं। इस बात में कोई शक नहीं कि आने वाले समय में बजट होम्स में क्रांति होगी और सरकारी स्तर पर भी गरीब से गरीब आदमी के घर का सपना पूरा करने के प्रयास किए जाएंगे, लेकिन इधर अरुण प्रभु का यह प्रयोग हमेशा याद किया जाएगा।

अमित कुमार

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1 comments:

  1. क्रिएटिविटी का कोई अल्टरनेट नहीं होता यह सबूत है इसका

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