कोविड के नाम पर जेडीए का आदेश बना जी का जंजाल


जयपर। कोरोना महामारी के नाम पर सरकारी विभागों में काम को लगभग ठप्प कर दिया है। सचिवालय से लेकर छोटे-बड़े विभागों में एंट्री बेरियर लगाए गए हैं। इसी क्रम में अब जेडीए का आदेश आम जनता के लिए जी का जंजाल बन गया है। पहले ही जेडीए काम न होने के चलते बदनाम हो रखा है और जनता में यह बात प्रचारित-प्रसारित है कि जेडीए में बाबू से लेकर ऊपर तक बिना पैसा दिए काम तक नहीं होते। इस छवि को पूर्व जेडीसी टी.रविकांत के कार्यकाल में जरूर सुधरते हुए  देखा गया था, लेकिन अब हालात पुराने जैसे हो चले हैं।

फिलहाल बात करें कोविड के बहाने आदेश निकालने की तो इस आदेश की तो जेडीए में ई-अपॉइंटमेंट की सुविधा आम आदमी के लिए आफत बन गई है। इस आदेश के अनुसार आवेदक को रजिस्टे्रशन करना होता है, फिर ई-अपॉइंटमेंट सेवा को सब्सक्राइब करना होता है। आवेदन संबंधित प्रकोष्ठ में जाता है और फिर मिलने का समय अलॉट किया जाता है। अपॉइंटमेंट की यह नई प्रक्रिया बुजुर्गों और जयपुर शहर से बाहर से आने वालों के लिए आफत बन गई है। काम जिस गति से हो रहे थे, वह ब्लॉक हो रहे हैं। दस फीसदी काम भी अब सुचारू रूप से नहीं हो पा रहे हैं। जेडीए से जुड़े लोगों का कहना है कि पब्लिक डीलींग के विभागों में इस तरह के आदेश सरलता से चलती प्रक्रिया को बाधित करने और काम में लचीलापन लाने के अलावा कुछ नहीं करेंगे। इसकी बजाय, सावधानी से मेल-मुलाकात और काम के प्रयास किए जाते, तो शायद ज्यादा सहूलियत होती। फिलहाल जेडीए की ओर से जारी इस आदेश की जमकर आलोचान हो रही है।

इस आदेश को लेकर जानकारों का यह भी कहना है कि ऐसे बेतुके आदेश तक निकाल दिए जाते हैं जब जनता की समस्याओं को सुनने और उनका समाधान करने से बचने के उपाय खोजे जाते हैं। इधर जानकारी में यह भी आया है कि एक अधिकारी से अब महज 7-10 लोग की औसतन मिल पा रहे हैं और जायज काम भी अटक रखे हैं। इस नए आदेश के चलते जेडीए में दलाल बड़े पैमाने पर सक्रिय हो गए हैं और अंदर काम करवाने के मुंहमांगे दाम मांग रहे हैं।
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